Kavi-Ganesh Dalvi
मिले जहा हम थी वो हसीं वादियाँ मौसम सुहाना सा थी वो सर्दीया बरफ से ढकी थी मस्त वो राहें बरफ ही बरफ थी पेडों की शाखायें तुम थे और मै थी बाहों मे बाहें इकदुजे मे खोयी हुयी थी निगाहें
©️®️ गणेश ✍✍
बहोत खूब गणेश 👌🏻👌🏻👌🏻
व्वा क्या बात है सुपर्ब
खूप सुंदर रचना 👌👌👌
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खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...
बहोत खूब गणेश 👌🏻👌🏻👌🏻
ReplyDeleteव्वा क्या बात है सुपर्ब
ReplyDeleteखूप सुंदर रचना 👌👌👌
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