खुदा की बंदगी का
रास्ता जो उसने पाया
उसको सुकूं ए रुख़ का
अंदाज नज़र आया
भटक रहा था वो भी
अब तक दर बदर को
खुदा के दर पे आ के
वो दर्द भुल पाया
गणेश 🙏🏼🙏🏼
खुदा की बंदगी का
रास्ता जो उसने पाया
उसको सुकूं ए रुख़ का
अंदाज नज़र आया
भटक रहा था वो भी
अब तक दर बदर को
खुदा के दर पे आ के
वो दर्द भुल पाया
गणेश 🙏🏼🙏🏼
बाजार मांडलेला असतो
निष्पाप त्या फुलांचा........
इच्छा नसूनही जन्म जातो
शेज सजवण्यात त्यांचा.....
कुणी सांगावे माणसांस
प्रेम विकत मिळत नसते.....
सर्व खेळ तो असतो
भावनांस कुस्करण्याचा.......
©️®️गणेश ✍✍
खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...