शुरू थी
महफ़िल
और आप का
आना हो गया.....
कह रहे थे
हम कुछ
और मिज़ाज़
शायराना
हो गया..........
©️®️गणेश ✍✍
शुरू थी
महफ़िल
और आप का
आना हो गया.....
कह रहे थे
हम कुछ
और मिज़ाज़
शायराना
हो गया..........
©️®️गणेश ✍✍
अब तो
लगता है....
तूम मेरे
जिंदगी की
आदत ही
बन गयी हो....
इतना प्यार
तुमसे है के
इबादत ही
बन गयी हो......
©️®️ गणेश ✍✍
वजूद उसका
कब का
मिट गया था...
लेकीन,
सब की
यादों में वो
हरपल
जिंदा रहा...
गणेश ✍✍
हम अंजाने
ही सही
मगर तेरे दिल में
बसते है....
कितने ही
बेगाने है जो
इन्ह रास्तो को
तरसते है.....
न जाने
और कितनो को
ये पनाह
होगी हासींल....
न जाने और
कितनो की
तुम होगी
तम्मना ए मंझिल....
©️®️गणेश
वो पलकें
झुका के
मुस्कुराना तेरा....
होटों को
दबा के
नज़र... चुराना तेरा.....
तरसते है तेरे
दिदार को हम....
और उस पर यूं
चेहरा... छुपाना तेरा....
गणेश ✍✍
खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...