Oct 22, 2021

खोयी निगाहें

मिले जहा हम
थी वो
हसीं वादियाँ
मौसम सुहाना सा
थी वो सर्दीया
बरफ से ढकी थी
मस्त वो राहें
बरफ ही बरफ थी 
पेडों की शाखायें
तुम थे और मै
थी बाहों मे बाहें 
इकदुजे मे खोयी
हुयी थी निगाहें 

©️®️ गणेश ✍✍


3 comments:

  1. बहोत खूब गणेश 👌🏻👌🏻👌🏻

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  2. व्वा क्या बात है सुपर्ब

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  3. खूप सुंदर रचना 👌👌👌

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