Oct 20, 2021

जिने की आस

कितीदा न रुचले ते करत गेलो
दूःख असताना खोटेच हसत गेलो
जिने की आस मे मरता चला गया
जितने की सोच मे हारता चला गया 

                           गणेश ✍✍


4 comments:

  1. खूप छान लिहिलंय अप्रतिम रचना

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  2. बहुत खूब 👌👌👌👌👌

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  3. अप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏

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