Kavi-Ganesh Dalvi
कितीदा न रुचले ते करत गेलो दूःख असताना खोटेच हसत गेलो जिने की आस मे मरता चला गया जितने की सोच मे हारता चला गया
गणेश ✍✍
खूप छान लिहिलंय अप्रतिम रचना
बहुत खूब 👌👌👌👌👌
अप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏
अतिशय सुंदर👌👌👌
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खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...
खूप छान लिहिलंय अप्रतिम रचना
ReplyDeleteबहुत खूब 👌👌👌👌👌
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