Oct 3, 2021

कातरवेळ

कातरवेळी आकाशाचा 
 गडद होतो नीळा रंग 
 पक्षांचे थवे पाहून 
 मुग्ध होते अंतरंग  




 शांत संध्येस या अश्या 
 आली आकाशाला लाली 
 मनही गहिवरले आणि
 तुझीच आठवण झाली  
              गणेश ✍✍
        

8 comments:

  1. वाह.. मस्तच सुंदर 👌👌👌

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  2. अप्रतिम रचना ������������

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  3. अप्रतिम गणेश दादा

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  4. अप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌🙏🙏

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  5. खूप छान लिहिलंय अप्रतिम

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