Oct 15, 2021

फ़नकार

वैसे तो कोई कलाम
तारीफ़ ए मोहताज
नही होता..... 
मगर इसका मतलब
ये तो नही के
वो कलाम
तारीफ़ ए काबिल
नही होता.....
यूं तो लिख जाते है 
हम जैसे... दिवाने
कई कलाम
ज़रुर साहीब 
मगर हर कोई
गालिब और
गुलजार जैसा
फ़नकार नही होता.... 
©️®️ गणेश ✍✍


3 comments:

  1. बहुत खूब सर 👌👌👌👌👌

    ReplyDelete
  2. बहुत बढिया लिखा आपने ✍️👌

    ReplyDelete
  3. अप्रतिम च 👌👌👌👌🙏🙏

    ReplyDelete

Publish Your Valuable Comments Here

Most Populer Post

खुदा की बंदगी

खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...