वैसे तो कोई कलाम
तारीफ़ ए मोहताज
नही होता.....
मगर इसका मतलब
ये तो नही के
वो कलाम
तारीफ़ ए काबिल
नही होता.....
यूं तो लिख जाते है
हम जैसे... दिवाने
कई कलाम
ज़रुर साहीब
मगर हर कोई
गालिब और
गुलजार जैसा
फ़नकार नही होता....
©️®️ गणेश ✍✍
बहुत खूब सर 👌👌👌👌👌
ReplyDeleteबहुत बढिया लिखा आपने ✍️👌
ReplyDeleteअप्रतिम च 👌👌👌👌🙏🙏
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