रस्मों से जुदा था
इस में सिर्फ
दिल से दिल ही
जुडा था
वैसे तो हम
बहोत
कम
मिलते थे
जब भी मिलते थे
ये दो दिल
बहलते थे
इक अनकहां सा
एहसास था वो
दिल के भी मेरे
बहोत पास था वो
परे जीने के
चौखट से था वो
दिल के लिए भी
बहोत खास था वो
©️®️ गणेश ✍✍
अप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏
ReplyDeleteअतिशय सुंदर रचना 👌👌👌👌👌
ReplyDeleteसुंदर रचना केली ������
ReplyDeleteवाहहह....👌👍💐🍫
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ReplyDeleteखूप छान 👌🏻👌🏻
ReplyDeleteअप्रतिम रचना..👌👍✍️🍫
ReplyDeleteलाजवाब👌👌👌
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