Oct 11, 2021

अनकहा एहसास

 तेरा मेरा रिश्ता 
 रस्मों से जुदा था 
 इस में सिर्फ 
 दिल से दिल ही 
 जुडा था 
 वैसे तो हम 
 बहोत कम  
 मिलते थे 
 जब भी मिलते थे 
 ये दो दिल बहलते थे 
 इक अनकहां सा 
 एहसास था वो 
 दिल के भी मेरे 
 बहोत पास था वो 
 परे जीने के 
 चौखट से था वो 
 दिल के लिए भी 
 बहोत खास था वो   
 ©️®️ गणेश ✍✍

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