हलकी बारीश की बुंदो सा
वो तेरे प्यार का असर
आने से छा जाती तेरे
दिल मे इक थंडी सी लहर
हल्की आहट होती है जब
दबे पांव तुम आती हो
खुब दिखती हो जब
शरमा के मुस्कांती हो
इन्ही अदाओंसे सनम
कायल मुझे बनाती हो
आती हो जब जब तुम
दिल को यूं हीं लुभाती हो
आती हो जब जब तुम
दिल को यूं हीं लुभाती हो
गणेश दळवी ✍✍
बहोद खुब गणेश दा
ReplyDeleteबहुत खूब सर 👌👌👌
ReplyDeleteबढिया प्रस्तुती जी!👌👌👌
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