Nov 5, 2021

तम्मना ए मंझिल

हम अंजाने
ही सही 
मगर तेरे दिल में
बसते है....
कितने ही
बेगाने है जो
इन्ह रास्तो को
तरसते है.....
न जाने
और कितनो को 
ये पनाह
होगी हासींल....
न जाने और
कितनो की
तुम होगी 
तम्मना ए मंझिल.... 

©️®️गणेश 


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