Kavi-Ganesh Dalvi
वो पलकें झुका के मुस्कुराना तेरा.... होटों को दबा के नज़र... चुराना तेरा..... तरसते है तेरे दिदार को हम.... और उस पर यूं चेहरा... छुपाना तेरा....
गणेश ✍✍
अतिशय सुंदर च अप्रतिम नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏
खुपच सुंदर शब्द रचना आहे अप्रतिम
अप्रतीम रचना...खुप छान...👌👍💐🍫
सुंदर शब्द रचना👌👌👌👌
सुंदर शब्द रचना 👌👌👌👌👌
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खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...
अतिशय सुंदर च अप्रतिम नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏
ReplyDeleteखुपच सुंदर शब्द रचना आहे अप्रतिम
ReplyDeleteअप्रतीम रचना...खुप छान...👌👍💐🍫
ReplyDeleteसुंदर शब्द रचना👌👌👌👌
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