Oct 26, 2021

जिंदगी की खतां

मैने इक खतां की थी

गुजर जाये जिंदगी तेरे साथ

बस ये रज़ा की थी

और, उसका सिला

क्या मिला

जिंदगी भर तेरी जुदाई

ये फैसला मिला 

            गणेश ✍✍


3 comments:

  1. व्वा क्या बात है सुपर्ब रचना

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  2. वाह..बहोत खूब..बहोत सुंदर 👌👌👌👌👌

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