Oct 6, 2021

पलचिन्ह

तुम हो, 
ना हो 
या मेरा 
वहम हो 
या दिल 
में छिपा 
एक प्यारा सा 
गम हो  
तेरे पलचिन्ह 
मै ना 
पहचान पाया 
दिल मे 
चले तुफां को 
न जान पाया  
गणेश ✍✍

8 comments:

  1. क्या बात है सुंदर अप्रतिम शब्द रचना आहे शेवटची ओळ खुपच सुंदर

    ReplyDelete
  2. अप्रतिम शब्दसौदर्य!✍️������

    ReplyDelete
  3. अतिशय सुंदर रचना केली दादा 👌👌👌

    ReplyDelete
  4. खूपच सुंदर 👌👌👌

    ReplyDelete
  5. अप्रतिम रचना नेहमीनेहमीप्रमाणेच👌👌👌👌👌🙏🙏

    ReplyDelete

Publish Your Valuable Comments Here

Most Populer Post

खुदा की बंदगी

खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...