हर रोज मै
तय करता था के...
आज करुंगा
तुमसे बात सनम...
दिल मे छुपी है
प्यार की जो....
दुंगा तुम्हें
सौगात सनम.....
मगर सामने जब तुम
आती थी.......
मेरे होश गुम
हो जाते थे......
रटे रटाये
अल्फाज़ भी....
न जाने कहां
खो जाते थे.....
हर रोज
ऐसा होता था....
हर रोज दिल
भरमाता था.......
दिल के उन
जज़्बातो को.....
मुझसे न
जताया जाता था....
इस बात को
तुम भी जानती थी...
के मेरी चाहत
और अरमान हो तुम....
सीने में धडकता
है जो दिल...
उस मेरे दिल की
जान हो तुम......
बातों मुलाकातों मे
जब जब तुम
मुस्कांती थी.....
तेरी वही अदा सनम
दिल को मेरे
लुभाती थी.....
इक दिन
मेरी चाहत को
तुमने भी
दिल से
अपनाया सनम....
मासुम से मेरे दिल को
अपने दिल मे
सजाया सनम.....
गणेश ✍✍
वाहह..खुप सुंदर अप्रतीम रचना...हिंदीवरही छान पकड आहे मराठीसोबतच... शुभेच्छा पुढील लिखाणासाठी...💐💐💐👍👍👍
ReplyDeleteधन्यवाद वैशाली 🌺🌺
Deleteवाह गणेश दादा खुप सुंदर शायरी,बेहतरीन 👍👍👍👍👌👌👌👌👌👌👌🚩👍
ReplyDeleteधन्यवाद मोहन दादा 🌺🌺
Deleteव्वाऽ क्या बात है..!
ReplyDeleteश्री गणेशाय......!!
मस्तच अप्रतिम रचना...!!👌
यादगार रहते है यही लब्ज ..!
💐🍧💐🍧💐🍧💐🍧💐🍧💐🍧💐🍧💐🍧
आबा 🙏
धन्यवाद आबा 🌺🌺
Deleteव्वा खूप छान लिहिलंय अप्रतिम रचना केली
ReplyDeleteअप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏
ReplyDeleteवाह..वाह..लाजवाब👌👌👌
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