Oct 6, 2021

मेरे जज़्बात

जहां से 
गुज़रता हूं 
तेरे जज़्बात 
साथ रहते है 
दिखता हूं 
एक मगर 
हम दोनो 
साथ चलते है  



   मै तुझे 
चाहूंगा बस 💕     
तू मुझे चाहे 
   न चाहे 
तकती रहेंगी    
🌹 राह को तेरे      
    ये मेरी      
 बेताब निगाहें   
  गणेश ✍✍

14 comments:

  1. खूप खूप मस्त रचना अप्रतिम

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  2. खूप खूप खूपच सुंदर रचना दादा 👍👍👌👌👌👌⭐⭐⭐⭐⭐⭐

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  3. सुंदर 👌🏻👌🏻 मराठी पण लिही

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  4. अतिशय सुंदर च 👌👌👌👌👌🙏🙏

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  5. खूपच छान...👍👌✍️🍫🌹

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  6. खूप सुंदर रचना केली सर 👌👌👌👌👌

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  7. अतिशय सुंदर रचना 👌👌👌

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