Oct 3, 2021

चाहुल घेते 

 चाहुल घेते तुझीच 
 माझे हे अधीर मन 
 आठवतो मी एकांती    
 तुझेमाझे धुंद क्षण 



 तुझे परत फिरुन पहाणे 
 मनात या रेंगाळले 
 आणि मग कागदावर 
 शब्द हे गंधाळले  
           गणेश ✍✍

10 comments:

  1. खुपच सुंदर रचना 👌👌👌

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  2. सुगंधी रचना 👌🏻👌🏻

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  3. अगदी गोड...सुगंधी सुंदर अप्रतिम रचना��������

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  4. दादा, अप्रतिम काव्यरचना!👌👌👌

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  5. अप्रतिम शब्द रचना...👍👌✍️🍫🍫🍫🍫🍫🌹

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  6. अप्रतिमच नेहमी प्रमाणे 👌👌👌👌👌👌👌🙏🙏

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  7. अतिशय सुंदर रचना ������������

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