Oct 23, 2021

वो सारे लम्हें

एकमेकांत गुंतणं आपलं
त्या वेळेचं दान होतं
पुढे काय होणार याचं
कुठे कुणाला भान होतं 




वो दिन भी क्या खुब थे सनम 
जब आखें लडाया करते थे
दिल में छिपाया नाम चुपके से
लब पे सजाया करते थे 

     ©️®️ गणेश ✍✍


6 comments:

  1. अप्रतिम च नेहमीप्रमाणे 👌👌👌👌👌🙏🙏

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  2. खूप खूप छान 👌🏻👌🏻👌🏻 एकदम भारी

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  3. अतिशय सुंदर रचना 👌👌👌👌

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  4. खूप सुंदर 👌👌👌👌

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  5. वाहह गणेशदा...खुप छान लीहीलय..👌👍💐🍫

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