Kavi-Ganesh Dalvi
काॅफि असो वा तू,
थकल्या जीवाला तू देते तजेला
मनाला असला जरी शिणवटा
तुझ्या संगतीत होतो बाजूला
अप्रतिम सुंदर लिखाण गणेश दादा
धन्यवाद मोहन सर 🙏🏼🙏🏼
खूप सुंदर रचना 👌👌👌
धन्यवाद 🙏🏼🙏🏼
खुप सुंदर दादा
धन्यवाद अनिल सर 🙏🏼🙏🏼
खूपच सुंदर 👌👌
अप्रतिम च 👌👌👌👌🙏🙏
धन्यवाद 🌺🌺
वाह मस्तच...👌🏻👌🏻
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खुदा की बंदगी का रास्ता जो उसने पाया उसको सुकूं ए रुख़ का अंदाज नज़र आया भटक रहा था वो भी अब तक दर बदर को खुदा के दर पे आ के वो दर्द ...
अप्रतिम सुंदर लिखाण गणेश दादा
ReplyDeleteधन्यवाद मोहन सर 🙏🏼🙏🏼
Deleteखूप सुंदर रचना 👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏🏼🙏🏼
Deleteखुप सुंदर दादा
ReplyDeleteधन्यवाद अनिल सर 🙏🏼🙏🏼
Deleteखूपच सुंदर 👌👌
ReplyDeleteअप्रतिम च 👌👌👌👌🙏🙏
ReplyDeleteधन्यवाद 🌺🌺
Deleteवाह मस्तच...👌🏻👌🏻
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